अब न पूछो ये, किसका ग़म मना रहा हूँ मैं,
दुनिया से नहीं ख़ुद से धोखा खा रहा हूँ मैं।।
क़द्र ही नहीं है जिस जोहरी को हीरे की,
क्यों न जाने उससे रिश्ता निभा रहा हूँ मैं।।
बेफिज़ूल जीने की जुस्तजू ने मारा है,
साँस को दे कर धड़कन घर चला रहा हूँ मैं।।
कौन कहता था तुमसे हिज्र है बिछुड़ जाना,
बाद दूर जाने के पास आ रहा हूँ मैं।।
तेरे शह्र में सब है पर न मोतबर कोई,
यानी गाँव क्या है बस ये बता रहा हूँ मैं।।
मोतबर-विश्वसनीय
श्री कुमार श्री
बिलासपुर
8319338331
दुनिया से नहीं ख़ुद से धोखा खा रहा हूँ मैं।।
क़द्र ही नहीं है जिस जोहरी को हीरे की,
क्यों न जाने उससे रिश्ता निभा रहा हूँ मैं।।
बेफिज़ूल जीने की जुस्तजू ने मारा है,
साँस को दे कर धड़कन घर चला रहा हूँ मैं।।
कौन कहता था तुमसे हिज्र है बिछुड़ जाना,
बाद दूर जाने के पास आ रहा हूँ मैं।।
तेरे शह्र में सब है पर न मोतबर कोई,
यानी गाँव क्या है बस ये बता रहा हूँ मैं।।
मोतबर-विश्वसनीय
श्री कुमार श्री
बिलासपुर
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