Sunday, February 9, 2020

शायरी

जो इश्क़ में यहाँ नाकामयाब मिलता है,

क़िताबों में उसी के इक गुलाब मिलता है।।


अगर है प्यास तो फिर तुम कुरेद कर देखो,

नदी हो रेत की हाँ फिर भी आब* मिलता है।।



जवाब  मैंने  बुरे  वक़्त  को दिया ऐसा,

वो मेरे सामने अब  लाजवाब मिलता है।।


तू ज़िन्दगी  है   मेरी मैं यूँ ही  नहीं कहता,

मुझे तो तेरे ही लफ़्ज़ों से ख्वाब मिलता है।।


उसे न कर तू यूँ बदनाम सरे महफ़िल,

वही है श्री' जो सभी से जनाब मिलता है।।


आब-पानी


                            श्री कुमार श्री

                               बिलासपुर

No comments:

Post a Comment