Thursday, February 13, 2020

कविता

मैं दहकता हुआ अंगार,
मैं समाज का नया विचार,
मैं ही संस्कृति का हूँ आधार,
अस्तित्व देश का क्या मेरे सिवा...
मैं भारत का युवा..मैं ही भारत का युवा..

भविष्य को अपने काँधे पर लादे,
भाग्य  को अपने  कर्म के इरादे,
मैंने ही निभाए असंभव को संभव करने के वादे
नवीन उत्साह, हिम्मत,संयम का मैं अगुआ......
मैं भारत का युवा ...मैं ही भारत का युवा..

मैंने ही जिए हैं  ये सारे इतिहास,
मैंने ही किया है सर्वस्व विनाश,
मैं हूँ कल की आशा और सब कुछ आज
विकट भीर में मैंने ही सबको साथ किया..
मैं भारत का युवा..मैं ही भारत का युवा..

गुरु को गर्व है जिसपर हुआ
साथ-साथ चले जिसके माँ की दुआ
मैं ही वो सूरज जो डूब कर फिर फिर उदय हुआ
काल भी मुँह बांधे खड़ी हो जाती देख जिसके इरादे जवां
मैं भारत का हुआ, मैं भारत का युवा, मैं ही भारत का युवा...

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