Saturday, February 1, 2020

Gazal आज की ग़ज़ल

#ग़ज़ल



ज़िन्दगी ये न दर-ब-दर गुज़रे
साथ तेरे   मेरा सफर गुज़रे।।

रक्खा है याद औ' भुला भी दिया,
तेरे ख्यालों से इस कदर गुज़रे।।

कारवां सा  चले  है यादों का
जब सफर में तिरा शहर गुज़रे।।

मैं किसी का बसेरा बन न सका,
इस सराए  कई बशर गुज़रे।।

तू  तसव्वुर    में  आये है जब भी,
सहरा-ए-दिल में इक नहर गुज़रे।।

चाशनी सा ही हर्फ़-हर्फ़ लगे,
तेरी जुबां से जब ख़बर गुजरे।।

इक ही पल में जी लेता हूँ मैं सब,
जब भी ज़ेहन से मेरा घर गुजरे।।


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