Wednesday, August 5, 2020

राम

राम नाम के दोहे
लेखनी -श्री कुमार श्री ,बिलासपुर

 दृढ़ प्रतिज्ञ रहना सदा,धीरज का अतिरेक
निर्बल का बल  है वही,वो बच्चे सा नेक।।

जो जीते संसार को,उसका हो उद्धार
जिसने सुमिरा राम को, वह जीता संसार।।

उसको बाहर ढूंढना,बिन मतलब का काम
कण-कण में है वह बसा,उसीका नाम राम।।

सोया मन और आतमा,उसे जगाये कौन
समझ सका वह राम जो,खुद को रक्खा मौन।।

पहले तो सूरज उगे,फिर जगता है देश
सभी जगह इक आतमा,भिन्न भिन्न है वेश।।

Thursday, February 13, 2020

कविता

मैं दहकता हुआ अंगार,
मैं समाज का नया विचार,
मैं ही संस्कृति का हूँ आधार,
अस्तित्व देश का क्या मेरे सिवा...
मैं भारत का युवा..मैं ही भारत का युवा..

भविष्य को अपने काँधे पर लादे,
भाग्य  को अपने  कर्म के इरादे,
मैंने ही निभाए असंभव को संभव करने के वादे
नवीन उत्साह, हिम्मत,संयम का मैं अगुआ......
मैं भारत का युवा ...मैं ही भारत का युवा..

मैंने ही जिए हैं  ये सारे इतिहास,
मैंने ही किया है सर्वस्व विनाश,
मैं हूँ कल की आशा और सब कुछ आज
विकट भीर में मैंने ही सबको साथ किया..
मैं भारत का युवा..मैं ही भारत का युवा..

गुरु को गर्व है जिसपर हुआ
साथ-साथ चले जिसके माँ की दुआ
मैं ही वो सूरज जो डूब कर फिर फिर उदय हुआ
काल भी मुँह बांधे खड़ी हो जाती देख जिसके इरादे जवां
मैं भारत का हुआ, मैं भारत का युवा, मैं ही भारत का युवा...

  *

Sunday, February 9, 2020

शायरी

जो इश्क़ में यहाँ नाकामयाब मिलता है,

क़िताबों में उसी के इक गुलाब मिलता है।।


अगर है प्यास तो फिर तुम कुरेद कर देखो,

नदी हो रेत की हाँ फिर भी आब* मिलता है।।



जवाब  मैंने  बुरे  वक़्त  को दिया ऐसा,

वो मेरे सामने अब  लाजवाब मिलता है।।


तू ज़िन्दगी  है   मेरी मैं यूँ ही  नहीं कहता,

मुझे तो तेरे ही लफ़्ज़ों से ख्वाब मिलता है।।


उसे न कर तू यूँ बदनाम सरे महफ़िल,

वही है श्री' जो सभी से जनाब मिलता है।।


आब-पानी


                            श्री कुमार श्री

                               बिलासपुर

Wednesday, February 5, 2020

Shayri

अब न पूछो ये, किसका ग़म मना रहा हूँ मैं,
दुनिया से नहीं ख़ुद से धोखा खा रहा हूँ मैं।।

क़द्र ही नहीं है जिस जोहरी को हीरे की,
क्यों न जाने उससे रिश्ता निभा रहा हूँ मैं।।

बेफिज़ूल  जीने की जुस्तजू ने मारा है,
साँस को दे कर धड़कन घर चला रहा हूँ मैं।।

कौन कहता था तुमसे हिज्र है बिछुड़ जाना,
बाद दूर   जाने  के पास  आ  रहा  हूँ  मैं।।

तेरे शह्र में सब है  पर न मोतबर कोई,
यानी गाँव क्या है बस ये बता रहा हूँ मैं।।

मोतबर-विश्वसनीय

                                श्री कुमार श्री
                                  बिलासपुर
                         8319338331

Monday, February 3, 2020

Cancer is not a disease

भले ही आपको इस बात पर यकीन न हो रहा हो, लेकिन यह पूरी जानकारी पढ़ने के बाद आप भी यही कहेंगे कि कैंसर कोई बीमारी नहीं बल्कि चिकित्सा जगत में पैसा कमाने का साधन मात्र है। 

 
पिछले कुछ सालों में कैंसर को एक तेजी से बढ़ती बीमारी के रूप में प्रचारित किया गया, जिसके इलाज के लिए कीमोथैरेपी, सर्जरी या और उपायों को अपनाया जाता है, जो महंगे होने के साथ-साथ मरीज के लिए उतने ही खतरनाक भी होते हैं। लेकिन अगर हम कहें कि कैंसर जैसी कोई बीमारी है ही नहीं तो? जी हां यह बात बिल्कुल सच है कि कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को स्वास्थ्य जगत में कैंसर का नाम दिया गया है, और इससे अच्छी खासी कमाई भी की जाती है। लेकिन इस विषय पर लिखी गई एक किताब 'वर्ल्ड विदाउट कैंसर' जो कि कैंसर से बचाव के हर पहलू को इंगित करती है और अब तक विश्व की कई भाषाओं में ट्रांसलेट की जा चुकी है, का दावा है कि कैंसर कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर में विटामिन बी17 की कमी होना है। 
 
आपको यह बात जरूर जान लेना चाहिए कि कैंसर नाम की कोई बीमारी है ही नहीं, बल्कि यह शरीर में विटामिन बी17 की कमी से ज्यादा कुछ भी नहीं है। इस कमी को ही कैंसर का नाम देकर चिकित्सा के क्षेत्र में एक व्यवसाय के रूप में स्थापित कर लिया गया है, जिसका फायदा मरीज को कम और चिकित्सकों को अधिक होता है। चूंकि कैंसर मात्र शरीर में किसी विटामिन की कमी है, तो इसकी पूर्ति करके इसे कम किया जा सकता है और इससे बचा जा सकता है। 

Saturday, February 1, 2020

Gazal आज की ग़ज़ल

#ग़ज़ल



ज़िन्दगी ये न दर-ब-दर गुज़रे
साथ तेरे   मेरा सफर गुज़रे।।

रक्खा है याद औ' भुला भी दिया,
तेरे ख्यालों से इस कदर गुज़रे।।

कारवां सा  चले  है यादों का
जब सफर में तिरा शहर गुज़रे।।

मैं किसी का बसेरा बन न सका,
इस सराए  कई बशर गुज़रे।।

तू  तसव्वुर    में  आये है जब भी,
सहरा-ए-दिल में इक नहर गुज़रे।।

चाशनी सा ही हर्फ़-हर्फ़ लगे,
तेरी जुबां से जब ख़बर गुजरे।।

इक ही पल में जी लेता हूँ मैं सब,
जब भी ज़ेहन से मेरा घर गुजरे।।