राम नाम के दोहे
लेखनी -श्री कुमार श्री ,बिलासपुर
दृढ़ प्रतिज्ञ रहना सदा,धीरज का अतिरेक
निर्बल का बल है वही,वो बच्चे सा नेक।।
जो जीते संसार को,उसका हो उद्धार
जिसने सुमिरा राम को, वह जीता संसार।।
उसको बाहर ढूंढना,बिन मतलब का काम
कण-कण में है वह बसा,उसीका नाम राम।।
सोया मन और आतमा,उसे जगाये कौन
समझ सका वह राम जो,खुद को रक्खा मौन।।
पहले तो सूरज उगे,फिर जगता है देश
सभी जगह इक आतमा,भिन्न भिन्न है वेश।।